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भारत में स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को रेस्टॉरेंट से अधिक लाभ कैसे है

भारत में बहुत लोगों का स्वयं का व्यवसाय शुरु करने तथा व्यवसायी बनने का सपना होता है लेकिन उनमें से बहुत कम ऐसे कम होते हैं जो स्ट्रीट फूड विक्रेता बनने की सोचते हैं। ऐसे लोग जो सोचते हैं कि स्ट्रीट फूड विक्रेता गरीब तथा उनमें कोई कौशल तथा प्रतिभा नहीं होता वो गलत हैं क्यूँकि स्ट्रीट फूड को करोङों भारतीयों द्वारा पसंद किया जाता है और साथ ही इसमें दिन प्रतिदिन बढ़ने की क्षमता है।

व्यवसायीयों को भी ऐसा लगता है कि सङक किनारे खाने का ठेला लगाने के बजाय रेस्टॉरेंट खोलकर ज्यादा इज्जत तथा पैसा कमाया दोनों कमोयो जा सकता है। कुछ समय पहले तक ये सही था किन्तु आज के समय में यह धारणा सही नहीं है क्यूँकि आजकल स्ट्रीट फूड विक्रेता भी अच्छे पैसे का साथ ही उचित दाम पर उच्च गुणवत्ता का भोजन परोसकर इज्जत भी प्राप्त कर सकते हैं।

अतः भारत में स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को रेस्टॉरेंट से अधिक लाभ कैसे है? पढें किस प्रकार कुछ स्ट्रीट फूड विक्रेताओं ने सफलता प्राप्त की तथा साथ ही उनके व्यवसायिक चातुर्य।

1. कम से कम पूँजी निवेश

सङक कीनारे भोजन विक्रेता बनने के लिये आपको थोङे बहुत परमिट तथा लाइसेंस का आवश्यकता पङती है तथा साथ ही कुछ उपकरणों को लगाने की आवश्यकता होगी। और जो भी उपकरण आप लगा रहे हैं उसका प्रयोग सालों साल करेगें जिससे पैसों की बचत होगी।

उदाहरण के लिये, गुरुग्राम की एक छोले कुलचे की स्टॉल वेंडर महिला ने तब मीडिया का ध्यान आकर्षित किया जब उसने एक अध्यापिका की नौकरी छोङकर 25,000 रुपयों के साथ छोले कुलचे का स्टॉल लगाना शुरु किया और अब उसका सलाना कारोबार कुल 8 लाख रुपये का है।

कुछ छोटे समोसावाले जो कि सही जगह पर स्थित है प्रति महिने 1 लाख तक कमाते हैं।

2. स्वयं के मालिक बने

करियर बिल्डर इंडिया के द्वारा कराए गये सर्वे के अनुसार,लगभग 10 में से 4 व्यक्ति ऐसा सोचते हैं और माना कि वो अपने बॉस से ज्यादा बेहतर हैं।

यदि आप भी उन भारतीयों में आते हैं और अपने बॉस को नापसंद करते हैं तो स्ट्रीट फूड विक्रेता बनने का विकल्प आपके लिये फायदेमंद हैं जिससे आप स्वयं अपने मालिक होगें।

आप सारे निर्णय भी स्वयं लेगें जैसे कब काम करना है, कब छुट्टियाँ लेनी हैं, कितना खाना स्टॉक करना है, कितने बार खाना बनाना होगा आदि।

3. अपने काम में माहिर हों

जब आप एक स्ट्रीट फूड विक्रेता होते हैं तब आप केवल एक स्टॉल तक बधें नहीं होते हैं। यदि आप अपने क्षेत्र में विशेषता रखते हों तो आप एक्सपर्ट बन सकते हैं तथा स्वयं का ब्रांड खङा कर सकते हैं।

मशहूर फास्ट फूड चेन बीटीडब्ल्यू जिसका पूरा नाम है बिट्टू ट्क्की वाला अब उनके 10 रेस्टॉरेंट हैं पर अयोध्या के श्री आर,एस यादव ने जब स्वयं का कुछ करने का फैसला किया तब उनके पास कोई व्यापारिक प्रशिक्षण नहीं था और ये उनकी एक नई शुरुआत थी।

उनकी स्वादिष्ट कुरकुरी टिक्की ही उनकी विशेषता थी तथा उनके कठिन परिश्रम और लगन ने उनके छोटे से स्टॉल को एक मशहूर फास्ट फूड चेन में बदल दिया जो कि अच्छे खाने तथा स्वच्छ वातावरण के कारण के कारण लोगों में जाना जाता है।

4. ग्राहकों से निकट सम्बंध [restrict]

जब आप स्ट्रीट फूड व्यवसाय में होते हैं तब सामान्यतः ग्राहकों से अच्छे सम्पर्क होते हैं जिससे कि आपको उनके स्वाद का पता चलता है और आप उन्हें बेहतर स्वाद परोसने की कोशिश कर उनको बार बार आपके पास आने के लिये प्रेरित करते हैं। इसका एक अच्छा उदाहरण बैंगलोर के फूड वैन मालिक का विशेष ग्राहकों सेवा के तौर पर विनम्र व्यवहार तथा चित्ताकर्षक मुस्कान है। रवि गोबी का फूड वैन अपने ग्राहकों को बेहद प्रसन्न रखता है, वो कुछ गुस्से वाले ग्राहकों को भी डील करते समय हमेशा अपने चेहरे पर मुस्कान रखते हैं जिससे कि कई बार क्रोधित ग्राहक भी जल्द ही गुस्सा छोङ देता है।

5. एक विशेष कौशल सीख उसमें निपुण बनें

स्ट्रीट फूड विक्रेता भी बेहद सफलता प्राप्त कर सकते हैं यदि वो कोई एक विशेष कौशल प्राप्त करें और अपने ग्राहकों को कुछ अनोखा तथा बेहतरीन स्वाद प्रदान करें।

इसका एक अच्छा उदाहरण भारत में डोसा प्लाजा की सफलता की कहानी है, इसके मालिक प्रेम गणपति ने अपने काम की शुरुआत एक बर्तन धोने वाले के रुप में की थी और अपना खुद का फूड कार्ट शुरु करने के लिये बहुत संघर्ष किया, और जल्द ही उनको एहसास हुआ कि वो स्वादिष्ट डोसा बना सकते हैं अतः उन्होनें सन् 1997-1998 में 26 प्रकार के अलग-अलग स्वाद के डोसे बनाकर इसमें महारत हासिल की जो कि जल्द ही 105 प्रकार तक पहुँच गई।

आज डोसा प्लाजा एक कई करोङ का व्यवसाय है और इसके सैकङो हजारों विश्वसनीय ग्राहक हैं।

6. पारिवारिक विरासत को सम्हालना

ज्यादातर रेस्टॉरेंट मालिक के बजाए स्ट्रीट फूड विक्रेता बनने का एक अन्य लाभप्रद कारण है आपके बच्चे आपके फूड कार्ट को आगे चलकर प्रयोग कर जीविकोपार्जन करेगें।

जब आप एक सफल फूड कार्ट चलाएँगे तो आगे चलकर आप अपने बच्चों को कम उम्र से ही व्यवसायिक गुण सीखा सकते हैं और बङे होने तक आप उनकों एक अच्छा व्यवसायी के रुप में ढाल सकते हैं और जब आपके बच्चे आपके व्यापार को सम्हालेगें तब आप अपने रिटायरमेंट को एंजाय करेगें तथा उनको आपकी विरासत को आगे ले जाते देखेगें।

शुरुआत में बताया गया था कि यदि जहाँ तक हो सके ग्राहक सेवा, नयापन, पूँजी निवेश, कौशल विकास तथा विशेषीकरण पर ध्यान देकर स्ट्रीट फूड विक्रेता रेस्टॉरेंट मालिक से ज्यादा आगे बढ सकते हैं क्यूँकि उनको नया करने तथा निर्णय लेने की ज्यादा स्वतंत्रता होती है। यदि आप एक प्रेरणादायी व्यवसायी हैं तो आप भी एक स्ट्रीट फूड विक्रेता बन सकते हैं और कठिन परिश्रम तथा

अनोखेपन से कुछ ही वर्षों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

अब जब आपको भारत मे स्ट्रीट फूड विक्रेता बनने के फायदों का बारे में पता है तो आप स्वयं खोजे और ऐसे जगह का पता करें जहाँ लोगों को स्ट्रीट फूड पसंद हो पर एक ही स्वाद से उब चुके हों और जो अच्छे स्वाद और गुणवत्ता के लिये अच्छे दाम देने को भी तैयार हों। शुभकामना

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