भारत में रेस्तराँ को कितनी बार अपना मेनू बदलना चाहिए

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भारत एक ऐसा देश है जहाँ खाने की भी पूजा की जाती है खाने के मामले में हम भारतीयों का कोई जवाब नहीं होता, जैसे हमारे धर्म,भाषा,वेशभूषा तथा बोलचाल में विविधता पाई जाती है ठीक उसी प्रकार हमारे खानपान में भी अनेक विविधताएँ पाई जाती हैं और आज के भागदौङ भरी जिंदगी में काम के थकान के बाद हर इंसान की एक ही इच्छा होती है और वो होती है एक बेहतरीन स्वाद की जिसकी कमी पूरी करते हैं अलग-2 प्रकार के वेज,नानवेज,चाइनीज,साउथ इंडियन रेस्तरॉँ। यही वजह है कि फूड बिजनेस आज के समय में सबसे ज्यादा प्राफिटेबल बिजनेस माना जाता है। लोग खाने के स्वाद के साथ ही क्वालिटी पर भी ध्यान देते हैं अतः लोगो को एक ही स्वाद से बाँध के रखना बेहद ही चुनौतिपूर्ण कार्य है इसलिए समय-2 पर हमें मेनू में बदलाव करना चाहिए।

सलाना खर्च का लेखा जोखा [restrict]

रेस्तराँ खोलने के बाद शुरुआती कुछ महिनों में प्राफिट नहीं होता है यह बिजनेस भी अन्य व्यवसायों की तरह समय लेता है। भीङ को आकर्षित करने तथा लोगों को और के लिए वापस आने में समय लगता है। नये स्थान व नये रेस्तराँ के बारे में जानकारी तथा मार्केट की कङी प्रतिस्पर्धा के बीच रहकर खुद को स्थापित करने में काफी समय लगता है। शुरुआती एक साल के लिए खुद को प्राफिट और नुकसान से अलग कर केवल बिजनेस को आगे ले जाने पर ध्यान देना चाहिए साथ ही अपने पास अतिरिक्त पूँजी का बैकअप भी रखना चाहिए जो कि जरूरत के समय रेस्तराँ के अन्य खर्चों को पूरा कर सके। कई बार हमारा लागत राजस्व से ज्यादा हो जाता है और इस स्थिति में हमें या तो अपनें मेनू में कटौती करनी पङती या फिर मेंन्यू की प्राइस इनक्रीज करनी पङती है

मेनू का मूल्य निर्धारण

रेस्तराँ में कस्टमर की भीङ को हमेशा बनाए रखने में जो सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है वो है मेनू। इसलिए मेनू का प्राइस इस प्रकार होना चहिए जिसे खर्च करने से पहले ग्राहक को सोचना ना पङे। अतः मेनू डिसाइड करने बाद उसकी कीमत तय करने से पहले आसपास के रेस्तराँ के मेनू तथा उनकी कीमतों का उचित आकलन करना बेहद जरूरी है क्यूँकि जिस डिश के लिए आप र्500 चार्ज कर रहे हैं उसी डिश का मूल्य कहीं र्400 है तो ग्राहक र्500 खर्च करने से पहले जरूर सोचेगा इस स्थिति में या तो आपको अपने डिश की क्वांटिटी अधिक रखनी होगी या फिर उस डिश को उच्च गुणवत्ता वाला दर्शाना होगा। इसके साथ ही मूल्य तय करने से पहले खाद्य की सम्पूर्ण लागत तथा उसे बनाए जाने में लगने वाले अन्य सामानों की लागत को भी देखना होगा साथ ही रेस्तराँ के अन्य मदों जैसे बिजली,पानी,साजसज्जा तथा कर्मचारी आदि के खर्चों को ध्यान में रखकर उसके अनुसार ही मेनू का मूल्य निर्धारित करना चाहिए।

विक्रेता तथा आपूर्तिकर्ता से समन्वय

फूड बिजनेस शुरु करने से पहले चाहे वो बङे लेवल पर हो या छोटे रेस्तराँ के लिए खाद्य सामाग्री के साथ ही अन्य वस्तुओं के नियमित आपूर्ति के लिए विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता की व्यवस्था करनी चाहिए इसके लिए सबसे जरूरी है आपके पास श्रेणियों के कम से कम दो-तीन सप्लायर होने चाहिए जिससे आपको बाजार की स्थीति तथा वस्तुओ के घटते और ज्यादा होते मूल्यों का सटीक जानकारी रहे इतना ही नहीं यदि आप दो या तीन आपूर्तिकर्ताओं से सम्पर्क रखते हैं तो यह आपके के एक अच्छे बैकअप का भी काम करता है जो कि अचानक आई संमस्या में मददगार साबित होगा अतः विक्रेताओं से स्वस्थ सम्बन्ध फूड बिजनेस के सफल तथा सुचारू कामकाज के लिए आवश्यक है।

मेनू का चयन

रेस्तराँ व्यवसाय में मेनू का चयन एक बेहद ही कठिन तथा चुनौतुपूर्ण कार्य है, कठिन इसलिए क्यूँकि मेनू ही वह मुख्य स्रोत है जिससे हमें हमारा राजस्व प्राप्त होता है इसलिए मेनू का निर्धारण बहुत ही सोच विचार कर किया जाना चाहिए। शुरुआती समय में हमें मेनू में कम से कम डिशेज रखनी चाहिए साथ ही डिशेज ऐसी होनी चाहिए जो आसानी से तथा कम से कम खर्चे में तैयार की जा सकें। इसके साथ ही हमें मेनू में स्थान तथा लोगों की पसन्द को ध्यान में रखकर किसी विशेष डिश को शामिल करना चाहिए जो कि उस रेस्तराँ की विशेष पहचान हो। कुछ डिशेज सिजनल होती हैं जो कि किसी विशेष मौसम ही बनाई जाती है क्यूँकि उनको बनाने में लगने वाला सामान उस मौसम में ही उपलब्ध होता है अतः मौसम के हिसाब से भी मेनू में फेरबदल होता रहता है।

और इन सबके साथ ही धैर्य रखने की जरूरत होगी क्यूँकि कोई भी कार्य रातोंरात सफलता नहीं देता है अतः मेहनत और धैर्य के साथ ही कोई कार्य करके सफलता पाई जा सकती है

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The FMCG Marketer's Guide to First-party Data Collection

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